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Banaras gharane ke tabla-vaadan mein Mukharha
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मुखड़ा एक तरफ जहाँ संगीत मं सौंदर्यात्मक वृध्दि करता है, वहीँ बंदिशों को पूर्णता में प्रदानकरता है जैसा की नाम से स्पष्ट होता है साहित्यिक भाषा मं जिस प्रकार मुखड़ा एक व्यक्ति के व्यक्तित्व को पूर्ण रूप से सामने लता है! उसी प्रकार मुखड़ा बंदिश सम्पूर्ण रचना को प्रकाशमान करता है ! अगर हम बंदिश के समग्र रूप को देखे सबसे अधिक आकर्षण मुखड़े में ही दिखाई है! तबला वदान के केष्ट्र मं मुखड़ा नामक शीर्षक मं इतनी सम्भावनाएँ हो सकती है, इस तरफ किसी का ध्यान केंद्रित नहीं हुआ! तबला वादन में मुखड़े का प्रयोग लगभग सभी घरानों में किया जाता है! परन्तु बनारस घराने के तबला वादन मं मुखड़ा वादन का केष्ट्र अधिक व्यापक है क्योंकि इस घराने के तबला वादन में अन्य घरानों की अपेक्षा पखावज के खुले बोलों का प्रयोग अधिक है! तबला वादन में इसका प्रयोग विद्वत श्रोताओं के साथ साथ जान साधारण को भी अपनी ओर आकर्षित करता है! बनारस घराने के तबला वादन में मुखड़ा नमक इस ग्रन्थ तबला विद्वान एवं नाधिंधिंना और धिरकित के जादूगर पंडित अनोखे लाल मिश्र जी द्वारा प्रयुक्त विभिन्न तालों मं विभिन्न तालों में प्रकार के मुखड़े से युक्त रचनाओं का संग्रह है! मेरे विचार से इस विषय पर इतना महत्वपूर्ण ग्रन्थ पहेली बार लिखा गया है! इस ग्रन्थ के अध्ययन से संगीत के साधक एवं शोधाथी लाभान्वित होंगे!
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